हस्त रेखाओं द्वारा इष्ट निर्धारण

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कुछ मनुष्य के पास सही कुण्डली होती है तो कुछ कुण्डली के आभाव में इष्ट निर्धारण हेतु भटकते रहते हैं । ऐसे भटकने वाले लोग अगर किसी योग्य हस्तरेखा विशेषज्ञ के पास जाकर जानकारी प्राप्त करें तो उन्हें भटकने से मुक्ति मिल सकती है अर्थात हाथ की रेखाएं बता सकती हैं कि किस देवी-देवता की पूजा ज्यादा लाभकारी होगी।

1- यदि हाथ में शनि की अंगुली सीधी हो, शनि ग्रह मध्य हो ते ऐसे व्यक्तियों को शनि देव की स्तुति अवश्य करनी चाहिए। नित्य शनि मंत्र का 108 बार जाप करने से मनुष्य के जीवन में सुख शांति व समृद्धि आती है। मंत्र - ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सह शनिश्चराय नमः।
2- यदि हृदय रेखा पर त्रिशूल बनता हो, उंगलियां चाहे टेढ़ी-मेढ़ी हों तो इन्हें भगवान शिव की आराधना व उन्हें ही अपना आराध्य मानना चाहिए। इससे जीवन में आने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है। ऊँ नमः शिवाय का जाप हितकारी है।
3- यदि हृदयरेखा के अंत पर एक शाखा गुरु पर्वत पर जाती हो तो इन्हें भक्त प्रवर हनुमान जी का पूजन करना चाहिए जिससे जीवन में आने वाली विपदाएं दूर होती हैं। ऊँ नमो हनुमंता या हनुमान चालीसा का पाठ करने से सुख शांति मिलती है।
4- यदि भाग्य रेखा खंडित हो व इसमें दोष हो तो इन्हें लक्ष्मी माता का ध्यान या लक्ष्मी मंत्र का जाप लाभकारी है। इससे आर्थिक कमियों का निदान होता है और घर में धन संपत्ति आती है। मंत्र इस प्रकार है- ऊँ श्रीं, ह्रीं, श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं सिद्ध लक्ष्म्यै नमः।
5- यदि हाथ में सूर्य ग्रह दबा हुआ हो, व्यक्ति को शिक्षा में पूर्ण सफलता न मिल पा रही हो, मस्तिष्क रेखा खराब हो, तो इन्हें सूर्य को जल देना चाहिए तथा सूर्य के पूजन के साथ सरस्वती का पूजन करना चाहिए। सूर्य मंत्र- ऊँ ह्रां, ह्रीं, ह्रौं सः सूर्याय नमः।
6- यदि जीवन रेखा व भाग्य रेखा को कई मोटी रेखाएं काटें तो इनके जीवन में प्रत्येक व्यवसाय में रुकावट आती है तो इस रुकावट को दूर करने के लिए ऊपर दिये गये लक्ष्मी मंत्र का जाप विधिवत् नित्य करना चाहिए।
7- यदि सभी ग्रह सामान्य हों, जीवन रेखा टूटी हो तो ये जीवन में दुर्घटनाओं का सूचक है। इसलिए इन्हें शिव आचरण या शिव स्तोत्र या ऊँ नमः शिवाय का जाप नियमित करना चाहिए।
8- यदि हृदय रेखा खंडित हो और साथ में हृदय रेखा से काफी सारी शाखाएं मस्तिष्क रेखा पर आ रही हों तो इन्हें मां दुर्गा का पूजन तथा दुर्गा सप्तशती का नित्य पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य का विचलन शांत होता है तथा इससे उसकी निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है।
9- यदि हृदय रेखा व मस्तिष्क रेखा एक हो या मस्तिष्क रेखा मंगल क्षेत्र तक जाती हो तो इन्हें भगवान कृष्ण का ध्यान करना चाहिए तथा मंत्र- ऊँ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करना चाहिए। इससे व्यक्ति को संतान सुख व वंश की प्राप्ति होती है।
10- यदि हाथ में भाग्य रेखा लंबी हो, जीवन रेखा गोल हो, हृदय रेखा सुंदर हो तो इन्हें मर्यादा पुरुषोम श्री राम का ध्यान और पूजन करना चाहिए। राम-राम के जाप से जीवन काफी सुखमय बन जाता है।
इन रेखाओं के साथ हाथ में कई अन्य रेखाएं हैं जो अन्य देवताओं की कृपा दृष्टि की ओर संकेत करती है इन रेखाओं का संपूर्ण विवरण इस लेख में नहीं किया जा सकता अतः अनेक अन्य देवताओं और उनकी कृपा दृष्टि के लिए योग्य हस्तरेखा विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है।
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योगेश मिश्र जी - 09453092553
नोट ( ज्योतिष के माध्यम से जुटाया गया धन सनातन ज्ञान पीठ संस्था के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए खर्च किया जाता है ! जिसमे गौ रक्षा भी शामिल है )
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